कविता
बढ़े चलोबढ़े चलो
राह पर चले चलो कदम-कदम बढ़े चलो आँखें हो लक्ष्य पर और लगन सच्ची हो हो भले ही सामने डरावनी गहरी नदी या पहाड़ ऊँचा हो रुको नहीं डरो नहीं झुको नहीं दबो नहीं आ जाए काल भी गर जूझने को तुझ से तो डटकर करो सामना हारो हरगिज नहीं भले ही मिट जाओ राह पर चले चलो कदम-कदम बढ़े चलो।राह पर चले चलो कदम-कदम बढ़े चलो आँखें हो लक्ष्य पर और लगन सच्ची हो हो भले ही सामने डरावनी गहरी नदी या पहाड़ ऊँचा हो रुको नहीं डरो नहीं झुको नहीं दबो नहीं आ जाए काल भी गर जूझने को तुझ से तो डटकर करो सामना हारो हरगिज नहीं भले ही मिट जाओ राह पर चले चलो कदम-कदम बढ़े चलो।
कविता संग्रह: “हाशिये पर से” · 2019