कविता

रूपांतरणroopaantran

दीपक हैं आप/जलते रहिए तब तकए जब तक घटित नहीं हो जाता ज्योतियों की ज्योति शिवस्वरूप में रूपांतरण आपका--- तब फिर कौन क्याघ् कौन कहांघ्घ् मैं कौनघ्घ्घ् इन सभी सवालों का एक ही सवाल जो उठेगा आपके मन में बार-बार/वह होगा - कोऽहम --- कोऽहम --- कोऽहम और उस सवाल का जवाब भी अपने ही अंदर से/किसी दिन जरूर मिलेगा आपको और वह जवाब होगा - सोऽहम --- सोऽहम --- सोऽहम।dipak hain aap/jalte rahie tab takae jab tak ghatit nahin ho jaataa jyotiyon ki jyoti shivasvaroop men roopaantran aapkaa--- tab phir kaun kyaagh kaun kahaanghgh main kaunaghghgh in sabhi savaalon kaa ek hi savaal jo uthegaa aapke man men baar-baar/vah hogaa - ko'ham --- ko'ham --- ko'ham aur us savaal kaa javaab bhi apne hi andar se/kisi din jaroor milegaa aapko aur vah javaab hogaa - so'ham --- so'ham --- so'ham.

कविता संग्रह: “हाशिये पर से” · 2019